सुधार गृह के दावे के बीच सेंट्रल जेल में ‘मनमानी राज’ के आरोप!

सुधार गृह के दावे के बीच सेंट्रल जेल में ‘मनमानी राज’ के आरोप!


धार्मिक आयोजनों पर कथित अड़ंगे से कैदियों में आक्रोश, महिला जेलर के रवैये को लेकर कभी भी बिगड़ सकते हैं हालात


बिलासपुर। रामराज्य और सुशासन की बातों के बीच प्रदेश के दूसरे बड़े जिले की सेंट्रल जेल में व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि जेल को सुधार गृह बनाने की सरकारी मंशा पर जेल प्रबंधन की कथित मनमानी भारी पड़ रही है। खासकर एक महिला जेलर के कथित अड़ियल रवैये को लेकर कैदियों में नाराजगी और बेचैनी का माहौल है। स्थिति यह है कि जेल की चारदीवारी के भीतर रहने वाले कैदियों को धार्मिक आयोजन जैसे संवेदनशील मामलों में भी कथित तौर पर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


धार्मिक आयोजन भी बना ‘अनुमति और मनमानी’ का खेल?


जेल सूत्रों से सामने आ रहे आरोपों के मुताबिक, कैदियों के धार्मिक आयोजनों को लेकर प्रबंधन का रवैया लगातार विवादों में है। आरोप है कि आयोजन की अनुमति और व्यवस्थाओं के नाम पर ऐसी शर्तें या अड़चनें सामने आ जाती हैं, जिससे कैदियों में असंतोष बढ़ रहा है। सवाल यह है कि जेल में अनुशासन के नाम पर धार्मिक भावनाओं को लेकर संवेदनशीलता क्यों नहीं बरती जा रही?


जेल में अनुशासन जरूरी, मगर तनाव की कीमत पर नहीं


जेल प्रशासन के लिए अनुशासन सर्वोपरि है, लेकिन अनुशासन और कथित मनमानी के बीच की रेखा को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। कैदियों का आरोप है कि छोटी-छोटी बातों पर सख्ती और धार्मिक गतिविधियों में कथित हस्तक्षेप ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है। यदि समय रहते स्थिति को नहीं संभाला गया तो जेल के भीतर विवाद बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।


सरकार की ‘सुधार गृह’ की सोच पर प्रबंधन के रवैये का साया


सरकार जेलों को केवल सजा काटने की जगह न मानकर सुधार और पुनर्वास का केंद्र बनाने की दिशा में काम कर रही है। ऐसे में यदि किसी जेल में प्रबंधन के स्तर पर कैदियों में असंतोष, धार्मिक आयोजनों को लेकर विवाद और अधिकारी के कथित मनमाने रवैये की शिकायतें सामने आती हैं तो यह पूरे सिस्टम के लिए गंभीर सवाल है।


अब निगाह जेल के आला अधिकारियों पर है कि वे इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराएंगे या फिर चारदीवारी के भीतर बढ़ रहे असंतोष को नजरअंदाज करते रहेंगे। सबसे बड़ा सवाल यही है—सुधार गृह की सोच चलेगी या फिर जेल प्रबंधन की कथित मनमानी?



सुशासन के ‘रामराज्य’ में सेंट्रल जेल का ‘मनमानी राज’!


सुधार गृह बनाने की सरकारी कवायद पर जेल प्रबंधन के कथित तुगलकी फरमान भारी, महिला जेलर के रवैये से कैदियों में उबाल


बिलासपुर। सरकार जेलों को सुधार गृह में बदलने का दावा कर रही है, लेकिन प्रदेश के दूसरे बड़े जिले की सेंट्रल जेल से सामने आ रहे आरोप इस दावे की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रहे हैं। आरोप है कि एक महिला जेलर की कथित जिद और मनमानी के आगे जेल की चारदीवारी में कैदियों का धैर्य जवाब देने लगा है। धार्मिक आयोजन तक कराने में कथित अड़ंगे और हर कदम पर सख्ती ने जेल के भीतर असंतोष को हवा दे दी है। कैदियों में बढ़ती नाराजगी अगर समय रहते नहीं थमी तो अनुशासन के नाम पर दबाया जा रहा यह असंतोष कभी भी बड़े विवाद का रूप ले सकता है।


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