रिश्वतखोरी मामले में सहायक ग्रेड-2 गौतम सिंह आयम दोषी साबित, अदालत ने सुनाई 3 साल के कठोर कारावास की सजा…

बलरामपुर। रिश्वत के मामले में सहायक ग्रेड-2 गौतम सिंह आयम को दोषी पाते हुए विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण हेमंत सराफ ने तीन वर्ष के कठोर कारावास के साथ 10,000 रुपए अर्थदण्ड की सजा सुनाई है. अर्थदण्ड अदा नहीं करने पर आरोपी को एक माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा. अभियोजन पक्ष की ओर से मामले की पैरवी राजेंद्र कुमार गुप्ता ने की.


अभियोजन के अनुसार, प्रार्थी नितेश रंजन पटेल वर्ष 2013 से 2017 तक की लंबित एरियर राशि 92,000 रुपए प्राप्त करने के लिए विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, वाड्रफनगर पहुंचे थे. कार्यालय में पदस्थ गौतम सिंह आयम ने सेवा पुस्तिका का सत्यापन कराने तथा एरियर बिल तैयार कर कोष, लेखा एवं पेंशन कार्यालय अम्बिकापुर में जमा कराने के एवज में 20,000 रुपए रिश्वत की मांग की थी. बाद में बातचीत के दौरान आरोपी 12,000 रुपए लेने पर राजी हो गया.

एसीबी से की शिकायत

प्रार्थी रिश्वत नहीं देना चाहता था और उसने आरोपी को रंगे हाथ पकड़वाने के उद्देश्य से एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) अम्बिकापुर में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत के सत्यापन के बाद 13 अगस्त 2024 को ट्रैप करने की योजना बनाई गई और रिश्वत की रकम 12,000 रुपए के साथ आरोपी को पकड़ने की कार्रवाई की गई.


न्यायालय की टिप्पणी

न्यायालय ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध गंभीर श्रेणी में आते हैं, जिनमें न्यूनतम तीन वर्ष से अधिकतम सात वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है. ऐसे मामलों में परिवीक्षा अधिनियम का लाभ नहीं दिया जा सकता. आरोपी 14 अगस्त 2024 से 13 नवंबर 2024 तक कुल तीन माह न्यायिक अभिरक्षा में निरुद्ध रहा. न्यायालय ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 428 के तहत इस अवधि को सजा में समायोजित करने के निर्देश दिए हैं.





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