राष्ट्रीय बेसबॉल प्रतियोगिता 2026 में छत्तीसगढ़ की बेटी वैदेही सिन्हा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया

कवर्धा। छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभाओं ने एक बार फिर राष्ट्रीय मंच पर अपनी चमक बिखेरी है. दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की बेसबॉल प्रतियोगिता में कबीरधाम जिले के एक छोटे से गांव नवागांव सोनपुरी की बेटी वैदेही सिन्हा ने शानदार प्रदर्शन कर प्रदेश को गौरवान्वित किया है. वैदेही के शानदार खेल की बदौलत छत्तीसगढ़ की टीम ने देशभर में दूसरा स्थान (Silver Medal) हासिल किया है.



पूरे जिले से एकमात्र खिलाड़ी थीं वैदेही

दिल्ली में 29 जनवरी से 3 फरवरी तक आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में हरियाणा, मध्यप्रदेश, असम, पंजाब और दिल्ली जैसी दिग्गज टीमें शामिल हुई थीं. गर्व की बात यह है कि पूरे कबीरधाम जिले से वैदेही सिन्हा एकमात्र ऐसी बालिका खिलाड़ी थीं, जिनका चयन छत्तीसगढ़ की टीम में हुआ था. उन्होंने पूरे टूर्नामेंट के दौरान बेहतरीन खेल कौशल का परिचय दिया.

मजबूत टीमों को मात देकर फाइनल में पहुंची टीम

छत्तीसगढ़ की टीम ने वैदेही के नेतृत्व और सहयोग से हरियाणा, मध्यप्रदेश, असम और पंजाब जैसी अनुभवी टीमों को एक के बाद एक शिकस्त दी. कड़े मुकाबलों को पार करते हुए टीम फाइनल तक पहुंची. खिताबी मुकाबले में टीम ने देश में दूसरा स्थान हासिल कर अपनी ताकत का लोहा मनवाया.


गांव में दिवाली जैसा माहौल, ढोल-नगाड़ों से हुआ स्वागत

3 फरवरी को प्रतियोगिता समाप्त होने के बाद जब वैदेही अपने गृह ग्राम नवागांव सोनपुरी पहुंचीं, तो ग्रामीणों ने उनकी जीत का जश्न किसी उत्सव की तरह मनाया. बेटी के स्वागत में पूरे गांव में ढोल-नगाड़े गूंज उठे. ग्रामीणों ने फूल-मालाओं और तिलक लगाकर अपनी लाडली का ऐतिहासिक स्वागत किया. हर ग्रामीण की आंखों में अपनी माटी की बेटी की सफलता के लिए गर्व साफ झलक रहा था.

अगला लक्ष्य: देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना

अपनी सफलता से उत्साहित वैदेही सिन्हा ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता और कोच के मार्गदर्शन को दिया है. वैदेही ने कहा कि “मेरा सपना एक दिन भारतीय जर्सी पहनकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करना है. मैं देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना चाहती हूँ और इसके लिए अपनी मेहनत जारी रखूंगी. गांव वालों ने जो प्यार और सम्मान दिया है, उसने मेरा हौसला और बढ़ा दिया है.”

वैदेही की यह सफलता कबीरधाम जिले और छत्तीसगढ़ की उन हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखती हैं.





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