• सेंट्रल जेल..
• चारदीवारियों के भीतर लगे सीसीटीवी फुटेज में घटनाक्रम कैद होने की उम्मीद.
• बहनों से बदसलूकी और मारपीट के आरोप, महिला जेलर व सिपाही की कथित दबंगई से फीका पड़ा भाई-बहन के प्यार का पर्व.
बिलासपुर. भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके सुखी जीवन की कामना करने पहुंची बहनों के लिए रक्षाबंधन का दिन बिलासपुर सेंट्रल जेल में कथित तौर पर दर्द और अपमान की याद बन गया। आरोप है कि जेल में बंद भाइयों से मिलने और राखी बांधने पहुंचीं बहनों व परिजनों के साथ महिला जेलर और उसके सहयोगी सिपाही ने बदसलूकी की और मारपीट तक की। हालात ऐसे बने कि जिस जेल के दरवाजे पर बहनें भाई की कलाई पर प्रेम का धागा बांधने पहुंची थीं, वहीं उन्हें कथित तौर पर अपमान और प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।
सेंट्रल जेल की महिला जेलर कोकिला वर्मा और सिपाही अश्वनी वर्मा पर मारपीट और बदसलूकी के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले की 'OMG NEWS NETWORK' ने पड़ताल की तो पता चला कि,15 वर्षों में पहली बार ऐसा होने का दावा किया जा रहा है, जब रक्षाबंधन जैसे संवेदनशील पर्व पर जेल प्रशासन की व्यवस्था और व्यवहार को लेकर इतने गंभीर आरोप सामने आए हैं। परिजनों का आरोप है कि वे दूर-दराज से अपने भाइयों को राखी बांधने और कुछ पल साथ बिताने की उम्मीद लेकर जेल पहुंचे थे, लेकिन वहां उन्हें कथित रूप से धौंस, बदसलूकी और मारपीट का सामना करना पड़ा।
सुबह एक बुजुर्ग महिला से की हुज्जत.
जेल के भीतर खाने से मिली जानकारी के अनुसार जेलर कोकिला वर्मा और सिपाही अश्वनी वर्मा की ने सुबह एक बुजुर्ग महिला से भी हुज्जत बाजी कर उसकी पिटाई करने का आरोप लगा है। इसके बाद शाम करीब 6 से 7 के बीच कोयंबटूर से पहुंचे एक परिवार के साथ भी हुज्जत बाजी और मारपीट की गई। बताया जा रहा है कि उक्त परिवार थोड़ा समय से लेट जेल पहुंचा था जिसे लेकर महिला जेलर और सिपाही भड़क गए और भीड़ नहीं संभाल पाने से कंझा जा कर अपना आपा खो बैठे।
बंदी भड़के.
महिला जेलर कोकिला वर्मा और सिपाही अश्वनी वर्मा की हरकत से जेल में निरुद्ध बंदियों का गुस्सा भड़क गया। रक्षाबंधन के दिन बहनों और परिजनों के अपमान से बंदी भड़क गए और विरोध करना शुरू कर दिया। जिसके बाद आननफानन में जेल प्रबंधन ने मामले को दबाते हुए बंदियों को शांत किया।
जहां बहनों की आंखों में खुशी के आंसू होने थे, वहां छलका दर्द.
रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के रिश्ते की मजबूती का प्रतीक माना जाता है। जेल में बंद कैदियों के लिए यह दिन इसलिए भी खास होता है, क्योंकि साल में मिलने वाले सीमित अवसरों में उन्हें अपनी बहनों और परिवार से भावनात्मक रूप से जुड़ने का मौका मिलता है। लेकिन आरोप है कि इस बार जेल परिसर में व्यवस्था संभालने के नाम पर महिला जेलर और उसके सहयोगी सिपाही का रवैया इतना कथित तौर पर सख्त और अमानवीय रहा कि बहनों के उत्साह पर पानी फिर गया।
‘जेल है, लेकिन इंसानियत भी तो होनी चाहिए’
नाम न बताने की शर्त पर परिजनों का सवाल है कि जेल में सुरक्षा और अनुशासन अपनी जगह है, लेकिन क्या इसके नाम पर महिलाओं और परिजनों के साथ बदसलूकी अथवा मारपीट जायज है? यदि आरोप सही हैं तो यह केवल जेल व्यवस्था पर सवाल नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को लेकर भी गंभीर चिंता का विषय है।
जेल प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल.
पूरे घटनाक्रम ने सेंट्रल जेल की कार्यप्रणाली और वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर रक्षाबंधन जैसे दिन जेल परिसर में ऐसी स्थिति कैसे निर्मित हुई? क्या महिला जेलर और उसके सहयोगी सिपाही के व्यवहार की शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची? यदि पहुंची तो क्या कार्रवाई हुई? और यदि नहीं पहुंची तो क्या जेल प्रशासन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जानकारी लेने की कोशिश की?
रक्षाबंधन पर सामने आए इन आरोपों ने बिलासपुर सेंट्रल जेल की व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि जेल विभाग इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई करता है या फिर बहनों की आंखों से निकले आंसू जेल की ऊंची दीवारों के भीतर ही दबकर रह जाते हैं।
जेल डीजी,जेल अधीक्षक और महिला जेलर वर्मा ने नहीं उठाया फोन.
इस मामले की गंभीरता के बाद 'OMG NEWS' के जेल डीजी हिमांशु गुप्ता , सेंट्रल जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी और महिला जेलर कोकिला वर्मा को फोन कर उनका पक्ष जानना चाहा लेकिन किसी ने फोन नहीं रिसीव करने की जहमत नहीं उठाई।
सिपाही अश्वनी वर्मा ने किया इंकार, कहा कि.
इस मामले को लेकर जेल के सिपाही अश्वनी वर्मा ने बताया कि मेल मुलाकात करवा जा रहा था। खुद को और महिला जेलर कोकिला वर्मा को पाक साफ बताते हुए सिपाही वर्मा ने अपनी सफाई दी कि कोयंबटूर से आया परिवार लाकब लगने के समय आए थे।
सूरज ढलने के बाद जेल अधीक्षक मंडावी से नहीं होता संपर्क.
यह चर्चा आम और खास हो चुकी हैंं कि शाम होते ही सेंट्रल जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी से संपर्क नहीं होता। कितनी बड़ी भी इमरजेंसी आ जाए न जाने श्री मंडावी किस धुन में धुत्त रहते है कि फोन नहीं उठाते है.
