नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दो आरोपियों को उम्रकैद विशेष पॉक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला.

• तत्कालीन सीनियर इंस्पेक्टर आशीष वासनिक की बेहतर विवेचना से आरोपी पहुंचे जेल.


• दोनों दोषियों को विभिन्न धाराओं में कुल 46 वर्ष की सजा और 54 हजार रुपए अर्थदंड.


सरायपाली. नाबालिग लड़की के अपहरण और उसके साथ दुष्कर्म के गंभीर मामले में सरायपाली की विशेष पॉक्सो अदालत ने दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) श्रीमती वंदना दीपक देवांगन की अदालत ने आरोपियों विनय उर्फ चूड़ामणि पिता साथिको कुंभार (25) और रामू पिता लक्ष्मिधर कुंभार (25) को विभिन्न धाराओं में कुल 46 वर्ष के कारावास के साथ 54 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। सरायपाली क्षेत्र में इस तरह की सजा सुनाए जाने का यह पहला मामला बताया जा रहा है।


2021 में नाबालिग के अपहरण के बाद दुष्कर्म का आरोप.


विशेष लोक अभियोजक वन स्वरूप सेन के मुताबिक घटना 18 जुलाई 2021 की है। ग्राम टिभूपाली, चौकी बलौदा निवासी विनय उर्फ चूड़ामणि और रामू पर 25 वर्षीय नहीं बल्कि नाबालिग लड़की के अपहरण और उसके साथ दुष्कर्म सहित गंभीर अपराध करने का आरोप था। पीड़िता के माता-पिता का निधन हो चुका था और वह अपने दादा-दादी के साथ ग्राम खीरापाली में रहती थी। घटना के समय वह अपने जीजा के घर ग्राम बाराडोली में मेहमान के तौर पर गई हुई थी।


घटना की रिपोर्ट सरायपाली थाने में दर्ज कराई गई थी। तत्कालीन सीनियर थाना प्रभारी आशीष वासनिक ने प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू की। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने मामला विशेष पॉक्सो कोर्ट सरायपाली में प्रस्तुत किया।


जुलाई और अगस्त 2021 में हुई थी गिरफ्तारी.


पुलिस ने दोनों आरोपियों को क्रमशः 27 जुलाई 2021 और 29 अगस्त 2021 को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद से दोनों आरोपी जेल में निरुद्ध थे। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं सहित पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया था।

साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर दोष सिद्ध

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और प्रकरण की परिस्थितियों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी पाया। इसके बाद विशेष न्यायाधीश श्रीमती वंदना दीपक देवांगन ने दोनों को पॉक्सो एक्ट के तहत आजीवन कारावास तथा विभिन्न धाराओं में कुल 46 वर्ष की सजा सुनाई। इसके अलावा दोनों आरोपियों पर कुल 54 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया। अदालत ने कहा—दंड का उद्देश्य अपराध पर रोक लगाना भी सजा सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश श्रीमती वंदना दीपक देवांगन ने कहा कि दंड विधि का उद्देश्य केवल अपराधी को दंडित करना नहीं है, बल्कि संविधान द्वारा निर्मित कानून के प्रति समाज की आस्था बनाए रखना भी है। दंड के माध्यम से अपराध की प्रवृत्ति को रोकना और अपराधी को अपराध से विमुख करना भी न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।


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