मकर संक्रांति विशेषांक.

‘पंडित अनिल पांडेय’

भारतीय मानक समय के अनुसार भगवान भुवन-भास्कर सूर्यदेव 14 जनवरी 2023 को रात्रि 20:45 पर मकर राशि में प्रवेश कर चुका है।

चुकि संक्रांति का समय रात्रि का है अत: मकर संक्रांति का पर्व रविवार 15 जनवरी को मनाया जा रहा है और यही सर्वथा उचित होगा । क्योंकि शास्त्रों के मतानुसार मेष व तुला राशि के संक्रांति के समय के दोनों ओर 10-10 घटी पूण्यकाल होता है परन्तु निर्णयसिन्धु के अनुसार मकर के प्रवेश के बाद की 40 घटी पुण्यकाल होता है । चुँकि मध्यरात्रिकाल से पहले है अत: रात्रि काल के संक्रांति लगने साथ ही पुण्यकाल प्रारंभ हो जायेगा तथा पुण्यकाल दूसरे दिन मध्याह्वन तक रहेगा ।

संक्रांति काल का पंचांग .

▪️संवत्सर – नल,
▪️विक्रम संवत – 2079,
▪️शक संवत – 1944,
▪️ईसवी संवत – 2023
▪️ऋतु – शिशिर,
▪️मास – माघ,
▪️पक्ष – कृष्ण,
▪️तिथि – अष्टमी,
▪️वार – शनिवार,
▪️नक्षत्र – चित्रा,
▪️योग – सुकर्मा,
▪️करण – बालव,
▪️जगलग्न – सिंह 20:3 से 22:20 तक,

संक्रांति विशेषता.

🔹इस संक्रांति का नाम – क्षिप्र,
🔹संक्रांति – सौम्यायन,
🔹संक्रांति का मुँख – दक्षिण मुखी,
🔹गमन – उत्तर दिशा,
🔹दृष्टि – ईशानकोण,
🔹वृष्टि – अग्नि,
🔹स्थिति – बैठी ।
🔹फल – मध्यम ।
🔹वाहन – बाघ ।
🔹उपवाहन – अश्व ।
🔹फल – भय ।
🔹वस्त्र रंग – पीला ।
🔹शस्त्र – गदा ।
🔹पात्र – चांदी ।
🔹भक्ष्य – दूध ।
🔹लेपन – केसर ।
🔹जाति – भूत ।
🔹पुष्प – चमेली ।
🔹वस्त्र – पर्ण।
🔹अवस्था – कुमारी,
🔹संज्ञा – राक्षस,

चुकि मकर संक्रांति शनिवार तिक्ष्ण वार, अष्टमी तिथि और चित्रा अर्थात मृदु नक्षत्र में हो रही है! अत: यह राक्षसी संक्रांति तो है। परन्तु कुछ हदतक यह परेशानियाँ कम खड़ी करेगी.

परन्तु रात्रि के पहले पहर में यह संक्रांति राक्षसों और पिशाचों के लिए कष्टप्रद रहेगी.

यह शनिवारी संक्राति के कारण राजाओं में कलह और अवृष्टि से दुर्भिक्ष होने की संभवना है.

यह संक्रांति स्वास्थ्य के लिहाज से मनुष्यों के लिए उचित नही है , इस शनिवारी संक्रांति के कारण इस मास पित्त, कफ और वात जनित जीवों में पित्त जनित रोगों की बढोत्री होगी तथा प्राणियों को पीड़ा होगा।

इस संक्रांति के साथ ही त्रिग्रहयोग भी बन रहा है! जिसमें मकर राशि में पहले से ही उपस्थित शनि और शुक्र के साथ अब सूर्य देव भी पहुंच जायेगे! इस योग में सूर्य देव शत्रुगृही हो जायेगें तथा अपने दो दो शत्रुओं शनि और शुक्र के साथ होने से उनकी अवस्था विकल होगी! अत: ऐसे में राजनीतिक उठापटक, जनता में तरह तरह के कलह और क्लेश व्याप्त होंगे.

कारोबार तथा महंगाई के लिहाज से यह राक्षसी संक्रांति होगी ठीक नही है। जिसके फल स्वरूप अचानक ही महंगाई तथा व्यापार में असामान्य गति से कभी मंदी-तेजी की हालत बनी रहेगी जो व्यापारियों और ग्राहकों कभी अनुकूल तो कभी प्रतिकूल सी जान पड़ेगी.

इस राक्षसी संक्रांति प्रभाव मौसम पर भी देखने को मिलेगा! कही कही वर्षा तो कभी ओलावृष्टि तो कही तेज हवाओं के साथ अत्याधिक ठण्ढ का प्रकोप बढेगा! फसलों पर भी बुरा प्रभाव पड़ेगा तथा प्राकृतिक आपदाओं में यह राक्षसी संक्रांति वृद्धि करेगी, एवं ज्यादे तर घटनायें रात्रिकाल के पहले और दूसरे पहर में ही घटित होंगी.

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