गिरदावरी ड्यूटी पर आरएईओ (RAEO) में आक्रोश: फसल सर्वेक्षण कार्य से मुक्त न करने पर चेतावनी, ठप हो सकते हैं विभागीय कार्य

गरियाबंद। प्रदेश में खरीफ फसल गिरदावरी 2026-27 को लेकर मचा प्रशासनिक घमासान अब और तेज हो गया है। तकनीकी खामियों से भरे ‘पीवी एप’ (भौतिक सत्यापन एप) से गिरदावरी करने से पहले पटवारियों और फिर राजस्व निरीक्षकों (आरआई) के हाथ खींचने के बाद अब प्रशासन ने इसका जिम्मा ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों (आरएईओ) पर थोपने की कोशिश की है। प्रशासन के इस एकतरफा फरमान के खिलाफ कृषि अमले में भारी आक्रोश है। अधिकारियों ने एक सुर में इस कार्य का बहिष्कार करते हुए मैदान में उतरने से साफ इनकार कर दिया है।



पूरे जिले में कुल 114 ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के पद स्वीकृत हैं, जिसके विरुद्ध में 52 पद भरे हैं, जिसमें 35 कृषि मैदानी अधिकारियों के भरोसे कृषि विभाग जिला गरियाबंद के सभी कार्य संचालित हो रहा है। इन अमलों की ड्यूटी कृषि फसल सत्यापन के लिए अपर कलेक्टर के माध्यम से लगाई गई है। अगर ड्यूटी नहीं हटाई जाती है तो कृषि विभाग का सभी काम बाधित होगा, जिसके कारण कृषि स्नातक शासकीय कृषि अधिकारी संघ ने अपर कलेक्टर एवं उपसंचालक कृषि को ज्ञापन सौंपा। संघ का कहना है कि अगर ड्यूटी नहीं हटाई जाएगी तो कृषि विभाग का विभागीय कार्य बाधित होगा।



कृषि विस्तार अधिकारियों को न तो नक्शा-बटांकन का तकनीकी ज्ञान है और न ही वे खसरों की वास्तविक सीमाओं से वाकिफ होते हैं। ऐसे में पटवारी और आरआई के पीछे हटने के बाद कृषि अधिकारियों को आगे धकेलना पूरी तरह अव्यावहारिक और अन्यायपूर्ण है। संघ ने स्पष्ट किया है कि गैर-विभागीय राजस्व ड्यूटी थोपने से कृषि विभाग की विभागीय योजनाओं, किसान हितैषी कार्यक्रमों और मैदानी कार्यों पर सीधा बुरा असर पड़ेगा।


कृषि स्नातक शासकीय कृषि अधिकारी संघ ने पीवी एप की जमीनी हकीकत उजागर करते हुए गंभीर तकनीकी सवाल खड़े किए हैं। संघ का कहना है कि भुइयां का नक्शा लगभग 3 वर्ष पुराना है। जमीन पर विभाजित लाखों खसरों का बटांकन नक्शे में दर्ज ही नहीं है। ऐसे में बिना सीमांकन और किसान की मौजूदगी के मौके पर खसरा पहचानना किसी भी सूरत में संभव नहीं है।

वर्तमान में खेतों में धान की फसल खड़ी है और भारी जलभराव है। पीवी एप की बाध्यता है कि खेत के चारों कोनों में जाकर जीपीएस लोकेशन के साथ लाइव फोटो लेनी होगी। पानी और कीचड़ से लबालब खेतों के कोनों तक पहुंचना जान जोखिम में डालने जैसा है।कृषि अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक यह अव्यावहारिक आदेश वापस नहीं लिया जाता और कृषि अमले को इस राजस्व कार्य से मुक्त नहीं किया जाता तब तक वे पीवी एप से गिरदावरी का कार्य कतई नहीं करेंगे। संघ ने शासन-प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि कृषि विस्तार अधिकारियों को उनके मूल दायित्वों जैसे किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, बीज-खाद उपलब्धता और विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन तक ही सीमित रखा जाए, न कि दूसरे विभाग की कार्य का बोझ उन पर लादा जाए।


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