सेक्सोफोन की दुनिया पर अनोखा आयोजन…2 सितंबर को राजधानी रायपुर में धूम मचाएंगे फनकार..

रायपुर.सुर और ताल के मुरीदों के शहर रायपुर में यूं तो हर रोज संगीत का कोई न कोई कार्यक्रम होते रहता है, मगर चंद कार्यक्रम ही ऐसा होता है जिसका असर लंबे समय तक कायम रहता है. जेहन में बस जाने वाला एक ऐसा ही कार्यक्रम 2 सितम्बर को सिविल लाइन स्थित वृंदावन हाल में होने जा रहा है.

अपना मोर्चा डॉट कॉम’ और संस्कृति विभाग के सहयोग से आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में वाद्ययंत्र सेक्सोफोन को बजाने वाले दो फनकार विजेंद्र धवनकर और लिलेश कुमार अपनी कला का शानदार प्रदर्शन करेंगे. गणेश चतुर्थी के मौके पर होने जा रहे इस खास आयोजन के मुख्य अतिथि होंगे पुलिस महानिदेशक दुर्गेश माधव अवस्थी.जबकि प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी और संस्कृति विभाग के संचालक अनिल साहू विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहेंगे. देश के प्रसिद्ध फिल्म अध्ययेता एवं विश्लेषक अनिल चौबे हिंदी फिल्मों में सेक्सोफोन की उपयोगिता को लेकर पर्दे पर अपनी प्रस्तुति देंगे. सेक्सोफोन पर आधारित एक कहानी साज-नासाज के जरिए देश व्यापी पहचान कायम करने वाले कथाकार मनोज रुपड़ा भी अपने अनुभव से कार्यक्रम को समृद्ध करेंगे.

यह सर्वविदित है कि बेलज्यिम के रहने वाले एडॉल्फ सैक्स म्यूजीशियन और इंस्टूमेंट डिजाइनर थे. एडॉल्फ तब लोकप्रिय हुए जब उन्होंने सेक्सोफोन का अविष्कार किया. यह वाद्ययंत्र जितना विदेश में लोकप्रिय हुआ उतना ही भारत में भी मशहूर हुआ. किसी समय तो इस वाद्ययंत्र की लहरियां हिंदी फिल्म के हर दूसरे गाने में सुनाई देती थीं, लेकिन सिथेंसाइजर व अन्य इलेक्ट्रानिक वाद्ययंत्रों की धमक के चलते इस वाद्ययंत्र का महत्व धीरे-धीरे घट गया. इधर एक बार फिर जब दुनिया ओरिजनल की तरफ लौट रही है तब लोगों का प्यार सेक्सोफोन पर उमड़ रहा है. ऐसा इसलिए संभव हो पा रहा है क्योंकि बाजार के इस युग में अब भी एक वाद्य ( सेक्सोफोन ) को समय का नायक मानने वाले लोग मौजूद है. ऐसे तमाम लोग मानते हैं कि दर्द और विषाक्त से भरे अंधेरे समय को चीरने के लिए सेक्सोफोन और उसकी धुन का होना बेहद आवश्यक है. बेदर्दी बालमां तुझको… मेरा मन याद करता है… है दुनिया उसकी जमाना उसी का… हंसिनी ओ हंसिनी… सहित सैकड़ों गाने ऐसे है जो आज भी इसलिए गूंज रहे हैं क्योंकि किसी ने इनमें सेक्सोफोन के जरिए अपनी सांसे रख छोड़ी है. छत्तीसगढ़ में भी चंद कलाकार ऐसे हैं जिन्होंने अपनी सांसों से इस वाद्ययंत्र की सांसों को थाम रखा है. उम्मीद की जानी चाहिए कि सेक्सोफोन की दुनिया…इस दुनिया से कभी खत्म नहीं होगी. यह कोशिश उसी दिशा में एक नन्हा सा कदम है.

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *