• एएसपी की शिकायत से रेंज आईजी, डीआईजी, एसपी समेत पुलिस विभाग मचा हाहाकार.
• आरोप •बिना सूचना सरकारी परिसर से हटाया गया सामान, एएसपी ने उठाए गंभीर सवाल.
• बड़ा सवाल. "आखिर किसके आदेश पर टूटा ताला और किस अधिकार से उठाया गया सामान?" — शिकायत के बाद विभाग में मचा हड़कंप.
बेमेतरा/सक्ति। पुलिस विभाग के भीतर एक ऐसा विवाद सामने आया है जिसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बेमेतरा में पदस्थ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) हरीश यादव ने शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया है कि सक्ती जिले में उनके द्वारा सुरक्षित रखे गए सामान को बिना अनुमति, बिना पंचनामा और बिना सूची तैयार किए ताला तोड़कर ट्रक में भर दिया गया।
मामला सामने आने के बाद पुलिस महकमे में चर्चाओं का बाजार गर्म है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर एक वरिष्ठ अधिकारी के सामान को हटाने जैसी कार्रवाई किसके निर्देश पर और किस प्रक्रिया के तहत की गई?
एक नजर घटनाक्रम पर.
शिकायत के अनुसार, सक्ती में पदस्थापना के दौरान सरकारी आवास उपलब्ध नहीं होने से एएसपी यादव ने अपना घरेलू और निजी सामान एएसपी कार्यालय परिसर के एक सुरक्षित कक्ष में रखा था। कमरे में ताला लगा हुआ था और उसकी चाबी उनके पास थी।
बताया गया है कि 5 जून को उन्हें सूचना मिली कि उनका सामान साइबर सेल कार्यालय से हटाया जा रहा है। जब उन्होंने जानकारी ली तो पता चला कि कमरे का ताला खोलकर नहीं बल्कि तोड़कर सामान बाहर निकाला गया और ट्रक में लोड कर दिया गया।
शिकायत में उठाए गए बड़े सवाल.
● किसके आदेश पर तोड़ा गया ताला?
यदि कमरे की चाबी संबंधित अधिकारी के पास थी तो ताला तोड़ने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
● सामान की सूची क्यों नहीं बनाई गई?
सरकारी प्रक्रिया के तहत सामान हटाने से पहले सूची, पंचनामा और दस्तावेजीकरण आवश्यक माना जाता है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ऐसा कुछ नहीं किया गया।
● वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी क्यों नहीं?
इतनी बड़ी कार्रवाई के दौरान पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कोई रिकॉर्डिंग नहीं की गई।
● जिम्मेदारी कौन लेगा?
यदि सामान के नुकसान, चोरी या गुम होने की स्थिति बनती है तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी?
ट्रक में भरकर खड़ा कर दिया गया सामान.
शिकायत में दावा किया गया है कि सामान को ट्रक में भरकर तिरपाल से ढंक दिया गया और बाद में फोन कर पूछा गया कि इसे कहां भेजना है। इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को और अधिक विवादास्पद बना दिया है।
वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची शिकायत.
मामले की शिकायत पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों तक पहुंच चुकी है। आईजी, डीआईजी और पुलिस मुख्यालय स्तर पर भी जानकारी दिए जाने की बात कही गई है। सूत्रों के मुताबिक मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है।
विभागीय गलियारों में चर्चा.
इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस महकमे में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। अधिकारी और कर्मचारी यह जानने को उत्सुक हैं कि आखिर ऐसी कार्रवाई के पीछे किसका आदेश था और क्या निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था।
अब जांच पर टिकी निगाहें.
मामले में यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की तलवार लटक सकती है। वहीं यदि कार्रवाई वैधानिक प्रक्रिया के तहत की गई है तो उसका रिकॉर्ड सार्वजनिक करना भी विभाग के लिए जरूरी होगा।
सवाल अभी बाकी हैं...
क्या ताला वास्तव में तोड़ा गया था?
क्या सामान हटाने का कोई लिखित आदेश था?
क्या सरकारी नियमों का पालन किया गया?
और सबसे बड़ा सवाल—इस पूरे घटनाक्रम का जिम्मेदार कौन है?
इन सवालों के जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएंगे।
नहीं हो पाया संबंधित अफसरों से संपर्क.
एएसपी हरीश यादव का कक्ष में रखे सामान को ताला तोड़कर ट्रक में लोड करवाने के मामले की पड़ताल के लिए 'OMG NEWS' ने शक्ति जिले के पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर समेत उनके मातहतों से फोन पर बात कर मसले की सत्यता जानना चाहा लेकिन किसी का फोन कनेक्ट नहीं हुआ.



