मुख्य बातें.
• आरोपी को उम्रकैद, विवेचक को मिला सम्मान.
• पॉक्सो एक्ट के गंभीर मामले में हुई थी कार्रवाई
आरोपी शारदा प्रसाद सोनकर को मिली आजीवन कारावास की सजा.
• तत्कालीन रतनपुर टीआई रतनपुर रजनीश सिंह ने की थी विवेचना.
• एसएसपी ने 2 हजार रुपये नगद पुरस्कार से किया सम्मानित.
बिलासपुर. पॉक्सो एक्ट के गंभीर प्रकरण में आरोपी को आजीवन कारावास की सजा दिलाने वाली विवेचना के लिए एसएसपी रजनेश सिंह की पुलिसिंग ने पीड़ित मासूम को न्याय मर्म लगाया है। इस मामले की गंभीरता से बेहतर विवेचना कर आरोपी को कोर्ट के आदेश पर आजीवन कारावास की सजा दिलाने वाले तत्कालीन रतनपुर टीआई रजनीश सिंह को कैश रिवार्ड से सम्मानित किया है।
मिली जानकारी के अनुसार तत्कालीन थाना प्रभारी रतनपुर और वर्तमान में थाना प्रभारी तोरवा के पद पर पदस्थ रजनीश सिंह को उत्कृष्ट विवेचना, त्वरित कार्रवाई और न्यायालय में मजबूत अभियोजन सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने 2 हजार रुपये के नगद पुरस्कार से पुरस्कृत किया है।
रतनपुर थाना में दर्ज अपराध क्रमांक 493/24, धारा 376(2)(ढ) भादवि तथा पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज 17 जुलाई 2024 को आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर जेल दाखिल करवा दिया था। मामले में निरीक्षक रजनीश सिंह ने विवेचना करते हुए आरोपी शारदा प्रसाद सोनकर को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा था। विवेचना पूर्ण कर समय-सीमा के भीतर न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान विशेष पॉक्सो न्यायालय ने साक्ष्यों और विवेचना को आधार मानते हुए 17 फरवरी 2026 को आरोपी शारदा प्रसाद सोनकर को दोषसिद्ध पाते हुए आजीवन कारावास एवं 2 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। प्रकरण में उत्कृष्ट पुलिस कार्य और प्रभावी विवेचना के फलस्वरूप एसएसपी कार्यालय द्वारा जारी आदेश में निरीक्षक रजनीश सिंह को नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है। पुलिस महकमे में इस कार्रवाई को बेहतर विवेचना और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए प्रोत्साहन के रूप में देखा जा रहा है।
कोर्ट ने कहा कि.
इस मामले की सुनवाई के दौरान विशेष पॉक्सो न्यायालय ने अपने पांच पन्नों के आदेश की एक कॉपी में टिप्पणी में कहा कि,अभियुक्त के चिकित्सीय रिपोर्ट में भी अभियुक्त को संभोग करने में सक्षम होना पाया जाना प्रतिवेदित किया गया है। प्रकरण में अभियोक्त्री को 12 वर्ष से कम की होना प्रमाणित में पाया गया है। वर्तमान मामले में यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि अभियुक्त, अभियोक्त्री की माता के साथ चुडी विवाह कर, साझे गृहस्थ में रहते हुए उसने अभियोक्त्री पर यौन अपराध (जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है) किया है, जो अभियुक्त की मानसिक स्थिति या मानसिकता को दर्शाता है। एक पिता के रूप में, वास्तव में, पीड़ित लड़की की मासूमियत और कमज़ोरी का फ़ायदा उठाने के बजाय उसे अकेले में सुरक्षा देना अभियुक्त का कर्तव्य था। अभियुक्त ने समाज की बुराइयों से बच्ची को पिता जैसा प्यार, स्नेह और सुरक्षा देने के बजाय उसे हवस का शिकार बनाया। यह ऐसा मामला है जिसमें विश्वास को तोड़ा गया है और सामाजिक मूल्यों को ठेस पहुंचाई गई है।



