हुक्का ऑन, कार्रवाई ऑफ! हाईवे के होटल में किसकी शह पर उड़ रहे धुएं के छल्ले?
टॉप फ्लोर पर हुक्का, नीचे सिस्टम मौन!
हाईवे के चर्चित होटल में कथित तौर पर रोज सज रही महफिल, कार्रवाई के बजाय ‘लेन-देन’ से मामला निपटाने के आरोप
थाने और आबकारी अमले की पहुंच से चंद कदम दूर धुएं के छल्ले, फिर भी कार्रवाई नदारद; आखिर किसकी शह पर चल रहा है कथित हुक्का कारोबार?
बिलासपुर। शहर के हाईवे पर स्थित एक चर्चित होटल के टॉप फ्लोर से एक बार फिर हुक्के का धुआं उठने की चर्चा है। आरोप है कि होटल में रोजाना युवा जुटते हैं और हुक्का पीने की महफिल सजती है। हैरानी की बात यह है कि जिस गतिविधि पर पुलिस और आबकारी विभाग की नजर होनी चाहिए, वहां कथित तौर पर दोनों विभागों की भूमिका ही सवालों के घेरे में है। थाना और संबंधित विभाग की मौजूदगी के बावजूद यदि होटल में यह सब बेरोकटोक चल रहा है, तो सवाल उठना लाजिमी है कि निगरानी आखिर किस काम की हो रही है?
धुएं के छल्ले उड़ते रहे, जिम्मेदारों की नजर क्यों नहीं पड़ी?
स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के मुताबिक, होटल में हुक्का सेवन का सिलसिला कोई एक दिन की घटना नहीं, बल्कि नियमित गतिविधि है। यदि यह जानकारी थानेदार, पेट्रोलिंग टीम और आबकारी अमले तक पहुंच रही है, तो अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या संबंधित अधिकारियों ने मौके पर जांच की, होटल संचालक से पूछताछ की या किसी तरह की वैधानिक कार्रवाई की? इन सवालों के जवाब सार्वजनिक होना जरूरी है।
कार्रवाई की जगह ‘लेन-देन’ से मामला रफा-दफा?
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप कथित लेन-देन के जरिए कार्रवाई टालने का है। चर्चा है कि जब भी बड़े स्तर पर हुक्का पार्टी की जानकारी सामने आती है, तो कार्रवाई करने के बजाय मामला कथित तौर पर निपटा दिया जाता है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि और किसी लेन-देन के ठोस प्रमाण सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में पुलिस और आबकारी विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि होटल के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई और शिकायतों के बावजूद कथित गतिविधि जारी रहने की वजह क्या है।
पेट्रोलिंग का दावा, फिर होटल तक निगरानी क्यों नहीं?
पुलिस की पेट्रोलिंग का उद्देश्य संवेदनशील स्थानों पर निगरानी रखना और संदिग्ध गतिविधियों पर समय रहते कार्रवाई करना है। यदि हाईवे के चर्चित होटल में नियमित रूप से हुक्का सेवन हो रहा है, तो पेट्रोलिंग टीम की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। वहीं, आबकारी विभाग को भी अपने अधिकार क्षेत्र और लागू नियमों के तहत स्थिति की जांच कर स्पष्ट करना चाहिए कि होटल में क्या गतिविधियां संचालित हो रही हैं और क्या कोई नियम उल्लंघन हुआ है।
जवाबदेही तय होगी या धुएं में उड़ जाएंगे सवाल?
मामला केवल हुक्का सेवन तक सीमित नहीं है। असली सवाल यह है कि यदि शिकायतें और सूचनाएं जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंच रही हैं, तो कार्रवाई का रिकॉर्ड कहां है? क्या होटल का निरीक्षण हुआ? क्या कोई उल्लंघन मिला? क्या नियमानुसार नोटिस, जब्ती या अन्य कार्रवाई की गई? और यदि कथित लेन-देन के आरोप गलत हैं, तो संबंधित विभाग इनका तथ्यात्मक जवाब क्यों नहीं देता?
अब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और आबकारी विभाग के जिम्मेदार अफसरों की जवाबदेही बनती है कि वे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं। होटल में हुक्का सेवन की वास्तविक स्थिति सामने आए और यदि नियमों का उल्लंघन या किसी अधिकारी की मिलीभगत प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई हो। वरना जनता के बीच यह सवाल बना रहेगा कि कानून का पालन कराने वाले विभागों की नजरों के सामने कथित गतिविधियां चलने पर आखिर जवाबदेह कौन है?