मुंगेली। छत्तीसगढ़ में मुंगेली जिले के नगर पंचायत जरहागांव में इन दिनों अवैध शराब बिक्री को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। नगर पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और पार्षदों सहित BJP नेताओं ने जहां एक ओर ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की थी, तो वहीं अब शराब दुकान के संचालकों पर कोचियों को सबसे पहले शराब देने के गंभीर आरोप लगे हैं।
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, नगर पंचायत अध्यक्ष रूपाली वेदप्रकाश कश्यप, उपाध्यक्ष मनोज कश्यप और पार्षदों सहित बीजेपी नेताओं ने थाना जरहागांव पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और क्षेत्र में चल रहे कथित अवैध शराब कारोबार पर तत्काल कार्रवाई की मांग की। जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि पुलिस अवैध शराब बिक्री पर रोक नहीं लगा सकती, तो फिर क्षेत्र के सभी लोगों को शराब बेचने की खुली अनुमति दी जाए। उन्होंने यहां तक कहा कि किराना दुकानों, पान ठेलों और अन्य छोटे व्यापारियों को भी शराब बेचने की इजाजत दी जानी चाहिए।

जनप्रतिनिधियों ने लगाए गंभीर आरोप
ज्ञापन में जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि नगर पंचायत क्षेत्र में लंबे समय से खुलेआम अवैध शराब का कारोबार चल रहा है, उनका कहना है कि इस वजह से क्षेत्र का सामाजिक माहौल बिगड़ता जा रहा है और महिलाएं, युवा तथा आम नागरिक परेशान हैं। जनप्रतिनिधियों ने साफ कहा कि यदि जल्द सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो क्षेत्रवासी आंदोलन और उग्र विरोध प्रदर्शन के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और पुलिस विभाग की होगी।
अब शराब विक्रेताओं पर बड़ा आरोपइधर ज्ञापन सौंपने के बाद अब शराब दुकानों के संचालन को लेकर भी बड़े आरोप सामने आए हैं। इन जनप्रतिनिधियों का कहना है कि देशी और विदेशी शराब दुकानों में पहुंचने वाली खेप पहले कथित “कोचीयों” को दी जाती है और उसके बाद आम उपभोक्ताओं को शराब मिलती है।

120 से 150 रुपए में बिक रही 80 वाली शराब
आरोप है कि शराब नीति का फायदा उठाकर कोचीये अलग-अलग लोगों को भेजकर एक बार में 20 से 24 पाव तक शराब खरीदते हैं और बाद में उसे जमा कर नगर व आसपास के क्षेत्रों में महंगे दामों पर बेचते हैं। आरोप यह भी है कि 80 रुपये की शराब 120 से 150 रुपये तक नगर में अवैध रूप से कोचीयों द्वारा बेची जा रही है। इतना ही नहीं, शराब दुकान विक्रेताओं पर कोचीयों के लिए अलग व्यवस्था होने का भी आरोप लगाया गया है।
कोचीयों को अलग दरवाजे से शराब देने के आरोप
जनप्रतिनिधियों के मुताबिक, कोचीयों को अलग दरवाजे से शराब दी जाती है, जबकि आम लोगों को अलग काउंटर पर लाइन लगानी पड़ती है। शराब विक्रेताओं पर निर्धारित कीमत से 10 से 20 रुपये अतिरिक्त लेकर कोचियों को शराब बेचने का भी आरोप लगाया है।
जनप्रतिनिधियों ने की मांग
बीजेपी नेताओं और पार्षदों का कहना है कि क्षेत्र में शराब की आसान उपलब्धता के कारण युवाओं में तेजी से नशे की लत बढ़ रही है और सामाजिक वातावरण खराब हो रहा है। महिलाओं में भी इसे लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है। जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि आबकारी विभाग और पुलिस संयुक्त कार्रवाई कर ऐसे लोगों की पहचान करे जो अवैध शराब कारोबार में संलिप्त हैं। साथ ही शराब दुकानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच कर पूरे नेटवर्क का खुलासा करने की मांग की गई है।

सुपरवाईजर ने कही यह बात
वहीं देशी शराब दुकान के सुपरवाइजर रमेश साहू ने कहा कि शासन की नीति के अनुसार एक व्यक्ति को 24 पाव तक शराब देने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग लोग शराब खरीदकर कहीं जमा करते हैं, तो दुकान कर्मचारियों के लिए यह पहचान करना मुश्किल है कि कौन कोचीया है और कौन सामान्य ग्राहक हम कैसे जानेंगे. वही कोचियों को पहले और आम लोगों को बाद में शराब बेचने तथा अलग अलग काउंटर व कोचियों को अधिक दाम पर शराब बेचने के आरोपों को सुपरवाईजर द्वारा ख़ारिज किया गया. वही अवैध शराब के कारोबारी एवं उससे जुड़े लोगों पर जनप्रतिनिधियों ने जाँच कर कार्रवाई की मांग की है.चाहे इसमें शामिल जो भी होपुलिस की कार्रवाई में जनप्रतिनिधि हस्तक्षेप न करे
मामला सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन भी हरकत में आया है। थाना स्तर पर अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया है। साथ ही जनप्रतिनिधियों से यह अपील भी की गई है कि किसी भी अवैध शराब कारोबारी को राजनीतिक या सामाजिक संरक्षण न दिया जाए।.



