TMC में जारी सियासी संघर्ष अब चुनाव आयोग की चौखट तक पहुंच गया है. असली TMC कौन और नकली TMC कौन है, ये जंग पार्टी में दो फाड़ होने के बाद से चल रही है. इसी कड़ी में TMC के बागी गुट ने गुरुवार दोपहर चुनाव आयोग से मुलाकात की. बागी गुट का 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिला. इस दौरान ऋतब्रत ने दावा किया कि वे ही असली टीएमसी हैं.
तृणमूल कांग्रेस में मचे सियासी घमासान के बीच ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात की.
ऋतब्रत बनर्जी ने मीटिंग से पहले कहा है कि उनका प्रतिनिधिमंडल आयोग के सामने अपना पक्ष रखेगा और यह बताएगा कि असली TMC उनका गुट है. ऋतब्रत बनर्जी ने कहा है कि 22 जून 2026 को विधानसभा के विशेष सत्र के बाद चुनाव आयोग को सभी जरूरी दस्तावेज भेज दिए गए थे.
उस समय हमने भारत के चुनाव आयोग से मिलने का समय मांगा था. आज मुख्य चुनाव आयुक्त और दूसरे चुनाव आयुक्तों ने हमारी बात ध्यान से सुनी.

विधायकों ने पार्टी में हुए संगठनात्मक बदलावों और नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी (NWC) को मान्यता देने की मांग की. चुनाव आयोग ने हमारी बात सुनी. उम्मीद है वे जल्द फैसला लेंगे. इस असली और नकली की लड़ाई में अब चुनाव आयोग रेफरी की भूमिका में नजर आने वाला है. तृणमूल कांग्रेस के नाम, चुनाव चिह्न और पार्टी के बैंक खातों में जमा बड़ी रकम पर मालिकाना हक की लड़ाई चुनाव आयोग तक पहुंच गई है.#WATCH | Delhi | A delegation of 10 TMC MLAs led by West Bengal LoP Ritabrata Banerjee met the Election Commission today
He says, "All India Trinamool Congress had a special session on 22nd June. Immediately after the session, we formally gave in writing to the Election… pic.twitter.com/KcqK7y6hhz
— ANI (@ANI) July 2, 2026
ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बागी खेमे ने आज चुनाव आयोग से मुलाकात की. ये सभी विधायक कल शाम ही दिल्ली पहुंच गए थे. दोनों गुट खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बता रहे हैं और पार्टी के चुनाव चिह्न पर अपना अधिकार जता रहे हैं.
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पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 22 जून को कोलकाता में प्रतिनिधि बैठक हुई थी. इसमें नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया गया था.TMC के 80 में से कमोबेश 58 विधायकों ने ममता बनर्जी के नेतृत्व से विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद से दूरी बना ली और ऋतब्रत बनर्जी के समर्थन में आ गए. दोनों गुट खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बता रहे हैं और पार्टी के चुनाव चिह्न पर अपना अधिकार जता रहे हैं. इसी मुद्दे पर ऋतब्रत बनर्जी ने चुनाव आयोग से मुलाकात की.अब ऐसा मन जा रहा है कि चुनाव आयोग रेफरी की भूमिका निभाते हुए दोनों पक्षों के दस्तावेज और दलीलें सुनने के बाद आगे की प्रक्रिया तय करेगा.



