पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में बाबरी मस्जिद का मुद्दा गरमाता हुआ दिख रहा है। मंगलवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ममता बनर्जी के साथ हुमायूं कबीर पर भी हमला बोला। अमित शाह ने कहा कि बीजेपी की जीत के बाद कोई माई का लाल राज्य में बाबरी मस्जिद से मिलती-जुलती मस्जिद का निर्माण नहीं करा पाएगा। शाह ने विधानसभा चुनाव में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस, दोनों को चुनौती दे रहे आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एजेंट तक करार दिया।
पश्चिम बंगाल में कैंप कर रहे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को एक साथ ममता बनर्जी और हुमायूं कबीर को निशाने पर लिया। उन्होंने हुमायूं कबीर को ममता बनर्जी का एजेंट बताया। अमित शाह ने मालदा के गाजोल में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि ममता दीदी और हुमायूं कबीर मेरी बात ध्यान से सुनें! यह भारत है और कोई भी माई का लाल यहां बाबरी मस्जिद नहीं बना सकता। इससे पहले शाह ने मालदा के मानिकचक इलाके में आयोजित चुनावी रैली में कहा कि हुमायूं कबीर को मेरी बात कान खोलकर सुननी चाहिए कि भाजपा (बाबरी जैसी) मस्जिद का निर्माण नहीं होने देगी।

आपकी बताते चले कि कबीर ने मालदा से सटे मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा इलाके में बाबरी मस्जिद से मिलती-जुलती मस्जिद के निर्माण का प्रस्ताव रखा था, जिसके बाद उन्हें पिछले साल दिसंबर में तृणमूल कांग्रेस से निलंबित कर दिया गया था। शाह ने आरोप लगाया कि कबीर अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना के निर्माण के लिए तृणमूल सुप्रीमो के इशारे पर काम कर रहे हैं। आगे गृहमंत्री ने गरजते हुए बोल कि ममता बनर्जी और TMC सांसद अभिषेक बनर्जी को भी पता हो जाना चाहिए कि बाबरी मस्जिद से मिलती-जुलती मस्जिद को बनाने का उनका सपना 5 मई को चकनाचूर हो जाएगा। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए मतदान दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होगा। वोटों की गिनती चार मई को की जाएगी।
पिछले साल छह दिसंबर 2025 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विध्वंस की 33वीं बरसी पर हुमायूं कबीर बेलडांगा में बाबरी जैसी मस्जिद की नींव रखी थी। इस परियोजना ने पूरे राज्य में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया था।
गृहमंत्री शाह ने आरोप लगाया था कि ममता और कबीर एक ही थाली के चट्टे-बट्टे हैं। पश्चिम बर्धमान जिले के कोयला खदान क्षेत्र रानीगंज में आयोजित एक चुनावी रैली में शाह ने ममता पर अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का विरोध करने का आरोप लगाया था। उन्होंने तृणमूल सुप्रीमो के इस कदम और मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर मस्जिद बनाने के कबीर के प्रस्ताव के बीच समानता दर्शाने की कोशिश की थी।



