धर्म रक्षा और सेक्यूलरिज्म एक साथ संभव नहीं.. बात और बढ़ेगी-अविमुक्तेश्वरानंद.

• संत से सत्ता पर सवाल, भास्कर दूत पत्र समूह को सराहा शंकराचार्य ने.


बिलासपुर. ज्योर्तिमय पीठ के शंकराचार्य स्वामि अविमुक्तेश्वरानंद ने भास्कर दूत समचार पत्र समूह की तारीफ करते हुए कहा कि देश में पहली बार संत के सत्ता तक सफर पर किसी अखबार ने संपादकीय लिखा है। ज्ञात हो कि उनके द्वारा उठाई गई जन बहस को शब्द देते हुए भास्कर दूत दैनिक समाचार पत्र समूह ने 18 मार्च को पृष्ठ चार पर संपादकीय लेख प्रकाशित किया है।


इसमेें लिखा गया था कि संत बनने के बाद जो धर्म रक्षा की शपथ ले लेता है वह वापस सत्ता में जाकर संंविधान की शपथ नहीं ले सकता, जिसमें सेकूरिज्म की शपथ लेनी पड़ती हो। इसका उदाहरण देते हुए यूपी के सीएम योगी आदित्य नाथ के गोरखनाथ पीठ के पीठाधीश्वेर होने और सीएम के रूप में संविधान की शपथ जिसमें सेक्यूलरिज्म की शपथ लेने पर सवाल उठाए गए हैं। लाभ के दो पद के अलावा संत और सत्ता के आचरण पर संपादकीय लेख ने एक जन बहस छेड़ी है। इस पर शंकराचार्य स्वामि अविमुक्तेश्वरानंद के बिलासपुर प्रवास के दौरान भास्कर दूत के बिलासपुर संस्करण के संपादक और लेखक मनोज शर्मा ने उनसे सौजन्य भेंट की।


उन्होंने कहा कि देश में पहली बार संत से सत्ता के सफर पर सवाल करते हुए संपादकीय लिखी गई। अब आगे और भी लोग लिखेंगे। उन्होंने बिलासपुर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष श्री शर्मा से कहा कि यह बात हम भी आगे और बढ़ाएंगे। आपने कहा कि लेख में सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए पूरी दमदारी से बात रखी गई है कि एक संत कैसे धर्म निरपेक्ष रह सकता है। सही को सही और गलत को गलत कहने के लिए आवाज उठनी चाहिए।





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