*“ढाबों पर सख्ती, पबों पर नरमी! बिलासपुर में अवैध शराब कारोबार पर कार्रवाई या महज़ औपचारिकता?”...*
बिलासपुर शहर में इन दिनों एक सवाल लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है,क्या पुलिस और आबकारी विभाग की सख्ती केवल छोटे-मोटे ढाबा संचालकों तक ही सीमित रहेगी, या फिर शहर के बीचों-बीच खुलेआम चल रहे पबों और कथित शराब कारोबारियों तक भी कानून की पहुंच बनेगी? हालात देखकर कई लोग तंज कसते नजर आते हैं कि कानून की नजर भी शायद अब “स्टेटस देखकर” ही काम करती है ,छोटा ढाबा दिख गया तो तुरंत कार्रवाई, लेकिन चमकदार पब और लाउंज जैसे जगहों तक शायद यह नजर पहुंच ही नहीं पाती,शहर के कई हिस्सों में पब और लाउंज के नाम पर देर रात तक शराब परोसे जाने की शिकायतें आम हो गई हैं। कुछ लोगों का कहना है कि आधी रात के बाद भी यहां महंगे दामों पर शराब की बिक्री होती है और युवाओं की भीड़ जुटती है। धीरे-धीरे यह जगहें केवल मनोरंजन के केंद्र नहीं, बल्कि विवाद और झगड़ों की खबरों के कारण भी चर्चा में रहने लगी हैं। आए दिन मारपीट या हंगामे की घटनाएं सामने आती हैं, जिससे आसपास के लोगों में असहजता भी बढ़ रही है।
इधर बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शहर में किसी भी प्रकार का अवैध कारोबार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा,आदेश सख्त है और मंशा भी साफ दिखाई देती है, लेकिन जमीन पर तस्वीर उतनी स्पष्ट नजर नहीं आती,यही कारण है कि लोगों के बीच सवाल उठता है कि जब नियम तय हैं, तो फिर देर रात शराब बिक्री पर प्रभावी रोक क्यों नहीं दिखती? युवाओं के भविष्य को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। कई अभिभावकों का कहना है कि पढ़ाई और करियर की उम्र में युवा इन पब संस्कृति की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। तंज कसते हुए कुछ लोग कहते हैं कि अगर यही हाल रहा, तो आने वाली पीढ़ी को किताबों से ज्यादा बार काउंटर और ग्लास से परिचय हो जाएगा,अब देखने वाली बात यह होगी कि पुलिस और आबकारी विभाग इन चर्चाओं और शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेते हैं। क्या कार्रवाई केवल छोटे ठिकानों तक ही सीमित रहेगी, या फिर कानून की नजर शहर के बड़े और चर्चित ठिकानों तक भी पहुंचेगी? फिलहाल शहर में यही चर्चा है कि अवैध कारोबार की असली परीक्षा रात के बाद ही शुरू होती है।



