35.05 मीट्रिक टन खाद की नीलामी रद्द, नाराज़ किसानों का चक्काजाम; सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें

आरंग। एक तरफ जहां खेती-किसानी के सीजन में क्षेत्र के किसान खाद के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक लापरवाही और कानूनी दांव-पेच ने किसानों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। समोदा स्थित मेसर्स महानदी बीज भंडार में कृषि विभाग द्वारा सील की गई 35.05 मीट्रिक टन खाद की आज होने वाली आम नीलामी अचानक टल जाने से उग्र हुए किसानों ने समोदा-लवन मुख्य मार्ग पर चक्काजाम किया।

जानकारी के अनुसार, कृषि विभाग ने पूर्व में समोदा के मेसर्स महानदी बीज भंडार पर कार्रवाई करते हुए लगभग 35.05 मीट्रिक टन खाद जब्त कर दुकान को सील कर दिया था। विभाग द्वारा इस सील खाद की आज खुली नीलामी की तारीख तय की गई थी। नीलामी की सूचना मिलते ही आसपास के गांवों से सैकड़ों की संख्या में किसान इस उम्मीद के साथ समोदा पहुंचे थे कि उन्हें खेती के लिए खाद मिल जाएगी, लेकिन मौके पर पहुंचने पर जब किसानों को पता चला कि दुकान संचालक/संबंधित पक्ष न्यायालय से स्टे ऑर्डर ले आया है और दुकान बंद है तो किसानों का गुस्सा फूट पड़ा।



किसानों का आरोप – एक तो खाद नहीं मिल रही, ऊपर से प्रशासनिक खेल

आक्रोशित किसानों ने कृषि विभाग के अधिकारियों और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए समोदा से लवन जाने वाले मुख्य मार्ग पर बैठकर आवागमन पूरी तरह ठप्प कर दिया। किसानों ने कृषि विभाग के अफसरों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, एक तरफ तो हमको सोसायटियों और बाजारों में खाद नहीं मिल रही है, फसलें खराब हो रही है। दूसरी तरफ जो खाद प्रशासन द्वारा जब्त की गई है और जिसकी आज नीलामी होनी थी, उसे जानबूझकर अधिकारियों की मिलीभगत से रोका जा रहा है। किसानों को बेवकूफ बनाया जा रहा है।



लवन मार्ग पर लगा कई किमी लंबा जाम, प्रशासन के हाथ-पांव फूले

किसानों द्वारा सड़क पर चक्काजाम किए जाने से समोदा-लवन मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। बसें, ट्रक और यात्री वाहन घंटों फंसे रहे, जिससे राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। प्रदर्शन की उग्रता और सड़क पर गाड़ियों की लंबी कतारों की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला और आरंग पुलिस की टीम भारी बल के साथ मौके पर पहुंची। खबर लिखे जाने तक प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस बल उग्र किसानों को समझाने-बुझाने और यातायात बहाल कराने के प्रयास में जुटे हुए हैं, हालांकि किसान खाद वितरण और मामले के तुरंत निस्तारण की मांग पर अड़े हुए हैं।





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