हनीट्रैप: सरकार और साजिश..

विजया पाठक..

हनीट्रैप मामले की जांच को लेकर प्रदेश की कमलनाथ सरकार की नियत पर सवाल खड़े होने लगे हैं। हर दिन हो जांच अधिकारियों के तबादलों से तो यही लग रहा है कि सरकार जानबूझकर मामले का दबाना चाहती है। क्योंकि अभी तक के खुलासों से यही लग रहा है कि इस मामले में प्रदेश के कई नेता और उच्च अधिकारी सीधे तौर पर लिप्त हैं, जिन्हें बचाने के लिए जांच में सरकार लीपापोती करना चाहती है। मौजूदा हालातों को देखकर तो यही लग रहा है कि सरकार नही चाहती कि हनीट्रैप मामले में शामिल लोगों के नाम उजागर हों।
बड़ी अजीब बात है कि इस मामले में पकड़ी गईं लकड़ियों से रोज पूछताछ की जा रही है और हर रोज नये खुलासे भी हो रहे हैं लेकिन ये खुलासे सामने नही आ रहे हैं। मतलब साफ है कि इस हाईप्रोफाइल मामले में सिर्फ और सिर्फ इन फंसाई गई लकड़ियों को ही मोहरा बनाया जायेगा और जिन लोगों ने इन लड़कियों का इस्तेमाल किया है वे बेदाग बाहर हो जायेंगे। यदि आरोपी लकड़ियों द्वारा जो नाम बताये जा रहे हैं उनसे जांच एजेंसियां बुलाकर पूछताछ तो कर सकती हैं लेकिन ऐसा भी जानबूझकर नही किया जा रहा है।
बार-बार जांच अधिकारियों के तबादलों से इस कांड के दायरे में फंस रहे नेता, अधिकारियों को सेटलमेंट करने का मौका मिल सकेगा। यानि वे सौदेबाजी कर अपने आप को बेदाग निकलने का प्रयास करेगा।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश के हनीट्रैप कांड की जांच के लिए बनाई गई एसआईटी के प्रमुख अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक संजीव शमी का तबादला कर दिया गया है। साथ ही नई एसआईटी का गठन किया गया है। राज्य में हड़कंप मचाने वाले इस कांड की जांच के लिए बनी एसआईटी में नौ दिन के भीतर यह तीसरा बदलाव है। इससे पहले भी दो बार एसआईटी प्रमुख बदले गए, जिस पर सवाल उठ रहे हैं। 23 सितंबर 2019 को एसआईटी जांच के लिए डीजीपी डी. श्रीनिवास वर्मा की अगुवाई में टीम गठित की गई। वह इंदौर के लिए रवाना हो पाते कि उससे पहले 24 सितंबर 2019 को दूसरी एसआईटी बनाई गई, जिसका प्रमुख संजीव शमी को बनाया गया। शमी ने तेजी से काम करना शुरू भी कर दिया था, तब उनको भी हटा दिया गया।
हनीट्रैप सेक्सकांड की महिला किरदारों की जद में सिर्फ मध्यप्रदेश के ही नेता, नौकरशाह और कारोबारी नहीं आए हैं, बल्कि उनका जाल छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गोवा तक फैला हुआ था। जांच एजेंसी के अधिकारियों के तबादलों से स्पष्ट हो गया कि जांच में गड़बड़झाला चल रहा है। जो अधिकारी जांच कर रहे हैं उन्हें खुद नहीं पता वह जांच में कब तक हैं। नित नये-नये खुलासे के नाम पर मध्यप्रदेश में अधिकारी, नेता और पत्रकारों को चरित्रहीन बताकर प्रचारित कराया जा रहा है।

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